प्रतियोगी छात्रों ने तदर्थ शिक्षकों को हटाने की किया मांग

सेवा में,
श्रीमती आराधना शुक्ला ,
अपर मुख्य सचिव (मा०शिक्षा)
उ०प्र०शासन।

विषय- सिविल अपील संख्या 8300/ 2016 तथा इससे संबद्ध 16 SLP एवं अन्य IA में सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिनांक 26/08/2020 को पारित आदेश तथा C.A. no. 8300/2016 में चयन बोर्ड द्वारा दाखिल M A no.818/2021 तथा इसमें संबद्ध तदर्थ शिक्षकों की सभी अवमानना याचिकाओं में दिनांक 07/12/2021 को पारित अंतिम आदेश के अनुसार चयन बोर्ड द्वारा जारी टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापन 2021 की भर्ती परीक्षा में सफल न होने वाले सभी तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों की सेवा कानूनी रूप से समाप्त होने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा याचिका संख्या- 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उ0प्र0 सरकार तथा अन्य में दिनांक 17/12/2015 को पारित आदेश तथा स्पेशल अपील (डिफेक्टिव)नं०215 of 2015 संतोष कुमार सिंह बनाम उ0प्र0 सरकार केस में 22/07/2015 को पारित आदेशों के अनुपालन में प्रबंधतंत्रों द्वारा अवैधानिक प्रक्रिया से दिनांक 07अगस्त 1993 से 26/08/2020 तक नियुक्त तथा टीजीटी/पीजीटी विज्ञापन 2021 की भर्ती परीक्षा में सफल न होने वाले सभी तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों का तत्काल वेतन रोकते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में संपूर्ण तदर्थवाद को समाप्त करने के लिए चयन बोर्ड चयनित शिक्षकों की भर्ती हेतु सभी तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों के रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन तत्काल भेजने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि प्रार्थीगण उ०प्र०मा०शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, प्रयागराज द्वारा टीजीटी/ पीजीटी पदों पर भर्ती हेतु जारी किए गए पूर्ववर्ती विज्ञापनों की भर्ती परीक्षा में शामिल होते रहे हैं। वर्तमान समय में चयन बोर्ड द्वारा सभी रिक्त पदों पर चयनित शिक्षकों की भर्ती के लिए आनलाइन अधियाचन लेने हेतु अधियाचन पोर्टल खोला गया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 दिए गए प्रावधानों के अनुसार तदर्थ शिक्षकों का पद भी मौलिक रूप से रिक्त माना जाता है। तदर्थ नियुक्ति से पूर्व रिक्त पद का अधियाचन चयन बोर्ड तक भेजा जाना अत्यंत आवश्यक है। चयन बोर्ड तक अधियाचन भेजे बिना तदर्थ शिक्षक की नियुक्ति ही नहीं की जा सकती है, किंतु वर्तमान समय में भी हजारों तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पद का अधियाचन ही चयन बोर्ड को प्राप्त नहीं है। 2001से लेकर 2021 विज्ञापन तक प्रबंधतंत्रों द्वारा तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों का अधियाचन भेजने में बहुत अनियमितता की है। चयन बोर्ड द्वारा बार-बार जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित करने पर भी तदर्थ शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन पूर्व में भी नहीं भेजा गया है। इस बार भी प्रतापगढ़, सुल्तानपुर सहित अनेक जनपदों के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधतंत्रों / प्रधानाचार्यों द्वारा अवैधानिक नियुक्त तदर्थ तथा अल्पकालिक शिक्षकों के रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन चयन बोर्ड द्वारा जारी आनलाइन अधियाचन पोर्टल पर नहीं भेजा जा रहा है। यह तदर्थवाद को समाप्त करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का घोर उल्लंघन है।
1982 के पूर्व अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति उ0प्र0 मा0 शिक्षा अधिनियम,1921की धारा 16 की उपधारा 01 से लेकर 11 तक के प्रावधानों के अनुसार प्रबंध तंत्र के माध्यम से होती थी। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अल्पकालिक रूप से रिक्त पदों पर अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्ति केवल उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16 E(11) के प्रावधानों के अंतर्गत किए जाने का नियम रहा है। इस धारा के तहत की गई नियुक्ति 11 माह (शिक्षण सत्र के समापन) के साथ ही साथ स्वत: समाप्त हो जाती है। इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ० डी०वाई० चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली वृहद पीठ द्वारा स्पेशल अपील (डिफेक्टिव) नं० 215 आफ 2015 संतोष कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस में 22/07/2015 को दिए गए वृहद आदेश में स्पष्ट रुप से लिखा है कि धारा 16 E (11) के तहत की गई अल्पकालिक नियुक्तियां शिक्षण सत्र के समापन अर्थात (11 माह) के आगे किसी भी दशा में जारी नहीं रह सकती हैं। ऐसी अल्पकालिक नियुक्तियां 11 माह के बाद स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं। अतः इस धारा 16 E(11) के तहत की गई अल्पकालिक नियुक्तियों का राज्य सरकार द्वारा विनियमितीकरण किसी भी दशा में नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने अन्य महत्वपूर्ण केस SLP(C) 9174 /2020 Ajoy Debbarama & others Vs State of Tripura में भी यह स्पष्ट किया है कि यदि कोई तदर्थ/ अस्थाई नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 16 तथा अन्य सांविधानिक उपबंधों का उल्लंघन करके की गई है तब किसी की दशा में ऐसी असंवैधानिक तथा अवैधानिक नियुक्ति को विनियमित नहीं किया जा सकता है।
इसी प्रकार से प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पद पर भर्ती भी मा0शिक्षा अधिनियम 1921 के अंतर्गत निर्मित प्रावधानों के अनुसार प्रबंध तंत्र के द्वारा की जाती थी। शिक्षकों तथा प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्ति में अनेक प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए इन एडेड माध्यमिक विद्यालयों में टी जी टी तथा पीजीटी शिक्षक तथा प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती करने के लिए उ0प्र0 मा0 शिक्षा अधिनियम 1921 के अंतर्गत निर्मित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 के नियमों के अधीन 10 जुलाई 1981 को प्रख्यापित उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग तथा चयन बोर्ड अध्यादेश 1981 के द्वारा तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग सेवा आयोग तथा चयन बोर्ड की स्थापना 14 जुलाई 1981 को हुई। “उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग तथा चयन बोर्ड ” की स्थापना तथा चयन प्रक्रिया के प्रारंभ होने में विलंब होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 में ही तदर्थ नियुक्ति हेतु मूल धारा 18 का प्रावधान किया गया। 1982 से लेकर 14 जुलाई 1992 तक विशेष परिस्थितियों में प्रबंध तंत्र को कठिनाई निवारण प्रथम तथा द्वितीय आदेश के अनुसार धारा 18 के प्रावधानों के तहत तदर्थ अध्यापकों की नियुक्ति का अधिकार बना रहा।
यह धारा 18 अध्यादेश संख्या 21, सन 1992 के द्वारा प्रथम बार संशोधित हुई । यह संशोधन 14 जुलाई 1992 से प्रभाव में आया। धारा 18 में प्रथम संशोधन 14 जुलाई 1992 को होने के पश्चात प्रबंध तंत्र को स्वत: तदर्थ नियुक्ति करने का अधिकार समाप्त हो गया। इस संशोधन के द्वारा तदर्थ रूप से सीधी भर्ती की सिफारिश करने का अधिकार जिला विद्यालय निरीक्षक की अध्यक्षता में गठित समिति को हस्तांतरित हो गया। इसके पश्चात धारा (18) पुनः 07 अप्रैल 1993 को संशोधित हुई। यह संशोधन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम (एक्ट संख्या -1 सन् 1993) दिनांक 07 अगस्त 1993 से प्रभावी हुआ। इसके पश्चात उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन) अध्यादेश 1995 (अध्यादेश संख्या 13, सन 1995) के द्वारा यह धारा 18 पुनः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग में स्थापित की गई। यह संशोधन 28/12/1994 से प्रभावी हुआ। इस संशोधन के पश्चात धारा 18 के तहत सीधी भर्ती से तदर्थ नियुक्तियों का चयन मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित चयन समिति के द्वारा किए जाने की व्यवस्था की गई। 28/12 /1994 से लेकर यह व्यवस्था अल्पकालिक नियुक्तियों के लिए 25 जनवरी 1999 तक तथा तदर्थ नियुक्तियों के लिए 30 दिसंबर 2000 तक बनी रही।

इसके बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन )अध्यादेश 2000 (अध्यादेश संख्या 19 सन 2000) के द्वारा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 33 में 33 च बढ़ाई गई। इसके द्वारा 14 मई 1991 से 6 अगस्त 1993 तक की अवधि की अल्पकालिक रिक्ति के प्रति नियुक्ति को विनियमित करने का प्रावधान किया गया । यह अध्यादेश अधिसूचना संख्या 5089/15-7-2001-(26)-94 दिनांक 7अगस्त2001द्वारा लागू है। इस संशोधन के द्वारा यह धारा 18 अध्यापकों की तदर्थ/अल्पकालिक नियुक्ति हेतु समाप्त कर दी गई। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 16 (1) तथा 16 (2) भी इस उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन )अध्यादेश सन् 2000 के लागू होने के बाद अति महत्वपूर्ण हो गई हैं। धारा 16(1) के अनुसार-अध्यापकों की प्रत्येक नियुक्ति उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग (संशोधन) अध्यादेश 2000 के प्रारंभ के दिनांक को या उसके पश्चात प्रबंध तंत्र द्वारा बोर्ड की सिफारिश पर ही की जाएगी। धारा 16(2) के अनुसार-उपधारा 16 (1) के उपबंधो का उल्लंघन करके की गई कोई नियुक्ति शून्य होगी।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की मूल धारा 18 के अंतर्गत मंडलीय चयन समिति की सिफारिश पर 7 अगस्त 1993 से 25 जनवरी 1999 तक नियुक्त अल्पकालिक तथा 7 अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (संशोधन )अधिनियम 2016 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 7,सन 2016) दिनांक 22 मार्च 2016 पारित किया गया। इसके द्वारा नवीन उप धारा 33छ जोड़ी गई। शिक्षा निदेशक द्वारा इस धारा 33छ के प्रावधानों के अंतर्गत निर्मित मंडलवार तथा जनपदवार राज्य स्तरीय सूची में 526 अल्पकालिक तथा 1408 तदर्थ शिक्षकों का विवरण उपलब्ध है । इस प्रकार इस संशोधन अधिनियम 2016 के अंतर्गत विनियमितीकरण की परिधि में धारा 18 के तहत मंडलीय चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्त कुल 1934 तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षक ही आ रहे हैं। इन सभी 1934 तदर्थ /अल्पकालिक शिक्षकों का विनियमितीकरण/स्थायीकरण किया जा चुका है। इस नवनिर्मित धारा 33 छ का बिंदु 1(क) ,1(ख),तथा 1 (ड.)के साथ ही बिंदु (7) तथा बिंदु (8) इस हेतु अति महत्वपूर्ण है।……. ……………. उपधारा 33छ बिंदु (1-क) के अनुसार- उ०प्र०मा०शिक्षा सेवा आयोग (कठिनाईयों को दूर करना)द्वितीय आदेश 1981के पैरा 2के तहत अल्पकालिक रिक्ति के सापेक्ष धारा 18 के अनुसार 07अगस्त 1993 से 25 जनवरी 1999तक नियुक्त अल्पकालिक शिक्षकों का विनियमितीकरण किया जायेगा।यदि वह रिक्ति बाद में मौलिक रिक्ति मे परिवर्तित हो गयी है। ध्यातव्य है कि धारा 18 के तहत 07अगस्त 1993 से लेकर 25/01/1999 के मध्य केवल राज्य सूची के 526 अल्पकालिक शिक्षकों के अतिरिक्त अन्य कोई भी शिक्षक इसकी परिधि में नहीं आ रहा है।
इसी तरह धारा 33(छ) बिन्दु (1-ख)के अनुसार धारा 18 के अनुसार मंडलीय चयन समिति के द्वारा चयनित 07अगस्त 1993 से 30 दिसम्बर 2000 तक नियुक्त ऐसे तदर्थ अध्यापकों की सेवाओं का ही विनियमितीकरण किया जायेगा जिनका धारा 33 छ(1-ड.)के अनुसार उपधारा (1)खण्ड (ख)के अधीन विहित प्रक्रियानुसार धारा 33-ग की उपधारा (2)के खण्ड (क)मे निर्दिष्ट मंडलीय चयन समिति द्वारा मौलिक नियुक्ति के लिए चयन किया गया हो। शिक्षा निदेशक द्वारा निर्मित राज्य सूचीबद्ध 1934 शिक्षकों के अतिरिक्त इस परिधि में कोई अन्य तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षक नहीं आ रहा है।

इसी तरह धारा 33छ बिन्दु (7) में स्पष्ट उल्लेख है कि तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों के विनियमितीकरण में आरक्षण के नियमों का पालन किया जायेगा।……..

उपधारा 33छ के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु (8) के अनुसार-“ऐसे तदर्थ शिक्षक जो उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग (कठिनाइयों का निवारण )आदेश 1981 के अनुसार या उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 18 के अनुसार नियुक्त नहीं किए गए हैं और अन्यथा जो केवल माननीय न्यायालय के अंतरिम /अंतिम आदेश के आधार पर वेतन प्राप्त कर रहे हैं, विनियमितीकरण के हकदार नहीं होंगे।”….. ध्यातव्य है कि इस शिक्षा निदेशक( माध्यमिक) द्वारा निर्मित सूची में सूचीबद्ध 1934 शिक्षकों से भिन्न अन्य कोई भी तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षक उपर्युक्त प्रावधानों का पालन किये बिना नियुक्त किये जाने के कारण विनियमितीकरण की परिधि में नहीं आ रहा है।
धारा 33छ (7) के विपरीत जाकर आरक्षण के नियमों का अनुपालन न करते हुए इन तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों का विनियमितीकरण नहीं किया जा सकता है क्योंकि इनकी प्रथम नियुक्ति ही संविधान तथा राज्य निर्मित अधिनियम में निहित आरक्षण के नियमों का उल्लंघन करके की गई है। इस संबंध में सिविल अपील संख्या 3595-3612 of 1999 Secretary,state of Karnataka and others Vs Umadevi and others केस में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा पारित आदेश सबसे बड़ा प्रमाण है।

अतः 07 अगस्त 1993 से लेकर 30 दिसंबर 2000 तक जनपदीय तथा मंडलीय चयन समिति की सिफारिश के बिना प्रबंध तंत्र द्वारा की गई तदर्थ शिक्षक की नियुक्ति उसी प्रकार से अवैधानिक है, जैसे 30 दिसंबर 2000 के पश्चात प्रबंध तंत्र द्वारा की गई तदर्थ शिक्षक की नियुक्ति। इसी प्रकार 07 अगस्त 1993 के पश्चात 25 जनवरी 1999 तक प्रबंध तंत्र द्वारा जनपदीय तथा मंडलीय चयन समिति के अनुमोदन के बिना प्रबंध तंत्र द्वारा की गई अल्पकालिक शिक्षक की नियुक्ति भी उसी प्रकार से अवैधानिक है जैसे कि 25 जनवरी 1999 के बाद की प्रबंध तंत्र द्वारा की गई अल्पकालिक शिक्षक नियुक्ति। इस कारण 07 अगस्त 1993 के पश्चात की सभी तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्तियों पर भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा C.A.8300/2016 तथा संबद्ध 16 SLP एवं अन्य IA में दिनांक 26/08/ 2020 को पारित आदेश उसी प्रकार बाध्यकारी है जैसे कि 30 दिसंबर 2000 के बाद की अवैधानिक तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षक नियुक्तियों पर बाध्यकारी है।

उपर्युक्त नियमों के प्रतिबन्धों के होते हुए भी प्रबंध तंत्रों के द्वारा अवैधानिक रुप से न केवल 07 अगस्त 1993 – 30 दिसम्बर 2000 तक अपितु 2000 के पश्चात भी अनवरत रूप से अवैधानिक तदर्थ/अल्पकालिक नियुक्तियां की जाती रही हैं। 2001 से लेकर अद्यावधि तक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, 23 एलनगंज प्रयागराज लगातार अनेक टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापनों के द्वारा प्रशिक्षित स्नातक तथा प्रवक्ता पद के रिक्त पदों पर भर्ती करता रहा है, किंतु उत्तर प्रदेश के जनपद प्रतापगढ़, सुल्तानपुर सहित अनेक जनपदों में स्थित अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षण संस्थाओं के प्रबंध तंत्रों द्वारा मौलिक रूप से रिक्त पदों का अधियाचन चयन बोर्ड तक न भेजकर स्वत: ही इन रिक्त पदों पर अवैधानिक तदर्थ नियुक्तियां किया जाता रहा है। चूंकि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 के प्रावधानों में 30 दिसंबर 2000 के पश्चात सभी प्रकार की तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्तियों पर प्रतिबंध लग चुका है, अतः प्रबंध तंत्रों द्वारा अल्पकालिक रिक्ति पर अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्ति हेतु उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16E ( 11 ) के तहत छात्र तथा संस्था हित को बताकर मौलिक रूप से रिक्त पदों पर भी एक शिक्षण सत्र (11माह) हेतु अल्पकालिक नियुक्तियां की जाने लगी। अनेक जनपदों में प्रबंध तंत्रों द्वारा धारा 16E (11) के तहत नियुक्ति न करके मौलिक रूप से रिक्त पदों पर अवैधानिक रूप से तदर्थ शिक्षकों की नियुक्तियां की जाती रहीं।

इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ लखनऊ के समक्ष याचिका संख्या- 3348 /एस0 एस0/ 2012 योजित की गई, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा याचिका को अंतिम रूप से दिनांक 14/02/ 2013 को निर्णीत करते हुए याची (श्री संजय सिंह) के वेतन भुगतान हेतु संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक को आदेशित किया। माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष इसी प्रकार की नियुक्ति का प्रकरण याचिका संख्या- 22520/ एस0 एस0/ 2013 प्रदीप कुमार बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य योजित की गई किंतु इस प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की एकल पीठ द्वारा आदेश दिनांक 01/05/ 2013 द्वारा याची को वेतन भुगतान का आदेश पारित नहीं किया गया और इस तदर्थ नियुक्ति को अवैध माना गया। याचिका संख्या- 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में माननीय एकल पीठ के समक्ष जब यह दोनों आदेश प्रस्तुत हुए तो माननीय न्यायालय द्वारा विधि के इस प्रश्न को न्यायालय की खंडपीठ को संदर्भित किया गया और माननीय न्यायालय की खंडपीठ द्वारा रिट संख्या 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उ0प्र0 सरकार केस में पारित आदेश दिनांक 17/12/ 2015 द्वारा याचिका संख्या- 3348/ एस0 एस0/ 2012 में पारित आदेश को सही माना गया और अवधारित किया गया कि अनुदानित अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रबंध तंत्रों को तदर्थ नियुक्ति करने का कोई अधिकार नहीं है।साथ ही सभी नियम विरुद्ध तदर्थ/अल्पकालिक नियुक्तियों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था। इसकी अपील सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील संख्या 8300/2016 संजय सिंह तथा अन्य बनाम उ0प्र0 सरकार में दाखिल की गई। लम्बी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा सिविल अपील संख्या 8300/2016 संजय सिंह तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य एवं इससे संबद्ध 16 अन्य SLP तथा अन्य IA में दिनांक 26/08/2020 को पारित आदेश में भी हाईकोर्ट के फैसले को सही माना गया, साथ ही संपूर्ण तदर्थवाद समाप्त करने के लिए सभी तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों को अपनी अनुच्छेद 142 की शक्ति का प्रयोग करके लाभ देते हुए केवल एकमात्र खुली भर्ती परीक्षा में प्रतिभाग करने तथा सफल होने पर ही नियमित करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि – “We may say at the inception that we are not in in disagreement with what has been set out in the impugned judgement but then this court has the benefit of article 142 of the the constitution of India to do complete justice between the parties and we are talking ricourse to this to deal with the mess which is before us i.e. a complete adhocism in the working of the education system whereby TGTs and lecturers have been working for years and decades without a regularization.” महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं भी निश्चित तिथि का उल्लेख नहीं किया है अपितु कोर्ट ने प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था से संपूर्ण तदर्थवाद को समाप्त करने की बात कही है। “We do find that everyone is to blame for this scenario as what what was and adhoc arrangement never fructiified in the proper regularization or by holding examination in which recruitment could take place, if the recruitments did take place, that was periodic that work in terms of examination held after long period of time.”

सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा दिनांक 26/08/2020 को दिए गए आदेश के बिंदुओं का अनुपालन करते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा दिनांक 15/03/2021 को टीजीटी तथा पीजीटी का संशोधित विज्ञापन जारी किया गया। विज्ञापन में वर्णित तथ्यों के अनुसार धारा 16E (11) में उल्लिखित प्रावधानों के तहत नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को उनकी प्रथम वेतन तिथि से वेटेज दिया जाना था।इस पर धारा 16E (11) के तहत नियुक्त किंतु अद्यतन वेतन न पाने वाले सैकड़ों अवैतनिक तदर्थ शिक्षकों ने वेटेज के लिए अलग-अलग अनेक अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया। सुप्रीम कोर्ट ने चयन बोर्ड की M.A. No.818/2021 के साथ सभी अवमानना याचिकाओं को संबद्ध करते हुए दिनांक 28/06/ 2021 को दिए गए आदेश में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया कि धारा 16E(11) के तहत नियुक्त सभी तदर्थ शिक्षकों को उनकी नियुक्ति तिथि से लेकर विज्ञापन की अंतिम तिथि तक की अवधि का वेटेज दिया जाए तथा संपूर्ण प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2021 तक संपूर्ण किया जाए। MA No.818/2021 से संबद्ध तदर्थ शिक्षकों की सभी अवमानना याचिकाओं को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने दिनांक 07/12/2021 को दिए गए अपने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख किया है कि राज्य सरकार /चयन बोर्ड द्वारा कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में दिए गए तथ्यों के आधार पर परीक्षा में शामिल 1446 टीजीटी तथा 09 पीजीटी संवर्ग के तदर्थ शिक्षकों में अधिकतम 40 तदर्थ शिक्षकों को अंतिम रूप से सफल घोषित किया जा रहा है। टीजीटी शिक्षकों के 1446 में से 150 आवेदक जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा मूल पत्रावली से सेवा सत्यापन के समय तदर्थ शिक्षक ही नहीं पाये गए हैं। शेष 1296 टीजीटी शिक्षकों में से केवल 126 शिक्षकों की ही नियुक्ति धारा 16E(11) में वर्णित प्रावधानों के तहत पायी गई है। इन सभी 126 शिक्षकों को वेटेज देने पर भी केवल 03 तदर्थ शिक्षक ही अंतिम रूप से सफल हुए हैं। पीजीटी संवर्ग में 09 मे से किसी भी तदर्थ शिक्षक की नियुक्ति धारा 16E(11) के प्रावधानों के तहत नहीं पायी गई है। सभी 1455 आवेदक तदर्थ शिक्षकों में बिना वेटेज मिले ही टीजीटी संवर्ग में 16 तथा पीजीटी संवर्ग में 03 (कुल 19) तदर्थ शिक्षक अंतिम रूप से सफल हुए हैं। इसके साथ ही साथ चयन बोर्ड के वकील द्वारा कोर्ट को बताया गया कि सभी आवेदक 1455 तदर्थ शिक्षकों को वेटेज दिये जाने की स्थिति में टीजीटी संवर्ग में 15 तथा पीजीटी संवर्ग में 03 तदर्थ शिक्षक सफल हो सकते हैं। इन 18 तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति धारा 16E(11) के तहत न होने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त शक्ति का प्रयोग करते हुए पुनः इनको वेटेज देकर सफल घोषित करते हुए लिस्ट एक सप्ताह में जारी करने का आदेश दिया है। चयन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के अनुपालन में इन 18 चयनित तदर्थ शिक्षकों की चयन सूची भी जारी कर दिया है।इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने इन 40 तदर्थ शिक्षकों के अतिरिक्त किसी भी अन्य तदर्थ शिक्षक को सेवा में बनाये रखने के लिए कोई भी आदेश नहीं दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 16E(11) के तहत नियुक्त तथा वेटेज पाने वाले इन 126 टीजीटी तदर्थ शिक्षकों को ही अवशेष वेतन एरियर देने के लिए सरकार को आदेशित किया है। इसके अतिरिक्त अन्य किसी तदर्थ शिक्षक को किसी भी तरह का लाभ देने हेतु सरकार को आदेश देने से साफ इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को 02 माह के भीतर संपूर्ण प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार भर्ती परीक्षा में सफल होने वाले इन 40 तदर्थ शिक्षकों के अतिरिक्त अन्य किसी तदर्थ शिक्षक को दो महीने के बाद वेतन देने के लिए सरकार उत्तरदायी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 16E (11) के प्रावधानों के अनुसार नियुक्त न होने वाले अवैधानिक तदर्थ शिक्षकों को वेतन देने के लिए प्रबंध तंत्र उत्तर दायी है। सुप्रीम कोर्ट ने भविष्य में तदर्थ शिक्षकों द्वारा इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में किसी भी तरह का मुकदमा दायर करने पर भी रोक लगा दिया है।

इलाहाबाद मंडल के जनपद प्रतापगढ़ सहित प्रदेश के अन्य मंडलों के सभी जनपदों में कठिनाई निवारण प्रथम तथा द्वितीय आदेश 1981 के अनुसार धारा 18 के अंतर्गत जनपदीय तथा मंडलीय चयन समिति के द्वारा न नियुक्त होने के कारण अवैधानिक रूप से नियुक्त हजारों तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षक कार्यरत हैं। पूर्व में वर्णित याचिका संख्या- 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा 17/12/ 2015 को दिए गए आदेश तथा इसकी सुप्रीम कोर्ट में हुई अपील सिविल अपील संख्या 8300/ 2016 संजय सिंह तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा इससे संबद्ध 16 SLP एवं अन्य IA में दिनांक 26/08 2020 को पारित आदेश के अनुसार टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापन 2021 में सफल न होने वाले सभी तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की सेवा कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने C.A.नं0 8300/2016 में दाखिल M A No. 818/2021तथा इसमें संबद्ध सभी अवमानना याचिकाओं को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए दिनांक 07/12/2021को दिए गए अपने महत्वपूर्ण आदेश में संपूर्ण मामले का पटाक्षेप कर दिया है।
इस समय चयन बोर्ड द्वारा विज्ञापन संख्या 1/2021 तथा 2/2021की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी बचे हुए हजारों की संख्या में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों सहित सभी रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन लेने की प्रक्रिया चल रही है। जनपद प्रतापगढ़, सुल्तानपुर सहित प्रदेश के अनेक जनपदों के तदर्थ शिक्षकों के हजारों रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन चयन बोर्ड तक नहीं भेजा जा रहा है। उपर्युक्त हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की अवैधानिकता के निम्नलिखित कारण हैं-
1-याचिका संख्या 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिनांक 17/ 12/ 2015 को पारित आदेश में अवैधानिक रूप से नियुक्त होने के कारण सभी तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्ति को अवैधानिक घोषित करते हुए वेतन भुगतान को रोकने का आदेश दिया है।

2- याचिका संख्या 655 S/S of 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा 17/12/2015 को पारित आदेश की अपील सुप्रीम कोर्ट में होने पर सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा सिविल अपील संख्या 8300/2016 संजय सिंह तथा अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा इससे संबद्ध 16 SLP एवं अन्य IA में दिनांक 26/08/2020 को पारित आदेश के अनुसार केवल एकमात्र अवसर पाकर चयन बोर्ड द्वारा किये गये टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापन 2021की भर्ती परीक्षा में सफल न होने वाले सभी तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों की सेवा कानूनी रूप से समाप्त हो गई है।

(3)- C.A. 8300/2016 केस में चयन बोर्ड द्वारा दाखिल M A No.818/2021 तथा इससे जुड़ी तदर्थ शिक्षकों की सभी अवमानना याचिकाओं को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा दिनांक 07/12/2021 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 तहत प्राप्त शक्ति का पुनः प्रयोग करते हुए समस्त तदर्थ टीजीटी तथा पीजीटी आवेदकों को विज्ञापन 2021 की भर्ती परीक्षा में वेटेज देकर मेरिट लिस्ट में सफल हो रहे 18 तदर्थ शिक्षकों की लिस्ट एक सप्ताह में जारी करने का आदेश दिया है। चयन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में इन 18 चयनित तदर्थ शिक्षकों की चयन सूची भी जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कुल 40 सफल हो रहे तदर्थ शिक्षकों के अतिरिक्त किसी अन्य तदर्थ शिक्षक को न तो निरंतर सेवा बनाये रखने हेतु और न ही वेतन देने के लिए कोई आदेश दिया है। इसके साथ ही धारा 16E (11) के प्रावधानों के अनुसार नियुक्त होने वाले 126 तदर्थ शिक्षकों को छोड़कर अन्य अवैधानिक तदर्थ शिक्षकों के अवशेष वेतन देने के लिए भी कोई आदेश देने से साफ मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 16E(11) के अनुपालन के बिना नियुक्त अवैधानिक तदर्थ शिक्षकों को वेतन देने हेतु केवल प्रबंध तंत्र उत्तरदायी है। इस प्रकार टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापन 2021 की भर्ती परीक्षा में अंतिम रूप से सफल होने वाले 40 तदर्थ शिक्षकों के अतिरिक्त किसी भी अन्य तदर्थ शिक्षक का वेतन भुगतान भविष्य में नहीं किया जा सकता है। अपने इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने अब भविष्य में इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में मुकदमा दाखिल करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

4– इन तदर्थ /अल्पकालिक शिक्षकों की प्रथम नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 ,15(4),16,16(4) तथा अनुच्छेद 309 का उल्लंघन होने के कारण असंवैधानिक हैं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा महत्वपूर्ण केस SLP(C)9174/2020 Ajoy Debbarama & others Vs State of Tripura में पारित आदेश तथा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा सिविल अपील संख्या- 3595-3612 of 1999 Secretary, state of Karnataka and others Vs Umadevi and others केस में पारित आदेश सबसे बड़ा प्रमाण है।

5- 07अगस्त1993 से लेकर 30 दिसंबर 2000 तक की धारा 33छ के प्रावधानों के अनुसार शिक्षा निदेशक (मा0)उ०प्र०शासन द्वारा निर्मित जनपदवार तथा मंडलवार राज्य स्तरीय सूची में शामिल 526 अल्पकालिक तथा 1408 तदर्थ शिक्षकों को छोड़कर अन्य सभी तदर्थ/ अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्ति धारा 18 मे विहित नियमानुसार जनपदीय तथा मंडलीय चयन समिति के द्वारा न होने के कारण असंवैधानिक तथा अवैधानिक हैं।

6- अल्पकालिक रिक्ति के प्रति उ0प्र0 मा0 शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16E(11) के अंतर्गत की गई अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्तियों के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा स्पेशल अपील डिफेक्टिव नं० 215 of 2015 संतोष कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस में 22/07/2015 को दिये गये आदेश के अनुसार अल्पकालिक शिक्षकों की नियुक्तियां अपने नियुक्ति के शिक्षण सत्र (11माह) के समापन के साथ ही साथ स्वत: समाप्त हो जाती हैं। अतः शिक्षण सत्र के समापन के बाद अल्पकालिक नियुक्तियां किसी भी दशा में आगे जारी नहीं रखी जा सकती हैं।
अतः उपर्युक्त कानूनी स्थितियों तथा न्यायालयीय आदेशों के आलोक में आपसे सविनय निवेदन है कि
(1)- धारा 33छ के प्रावधानों के अनुसार शिक्षा निदेशक (मा0) उ०प्र० शासन द्वारा निर्मित राज्य स्तरीय सूची में शामिल न होने वाले 07अगस्त1993 से लेकर 30 दिसम्बर 2000 तक नियुक्त अवैधानिक तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों का विनियमितीकरण न किया जाए।

(2)- इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा रिट संख्या 655 S/S of 2014 अभिषेक त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार तथा अन्य केस में 17/12/2015 को पारित आदेश तथा सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा सिविल अपील संख्या 8300/2016 तथा इससे संबद्ध 16 अन्य SLP तथा अन्य IA में दिनांक 26/08/2020 को पारित आदेश तथा C A 8300/2016 में चयन बोर्ड द्वारा दाखिल M A No 818/2021 तथा इससे संबद्ध तदर्थ शिक्षकों की सभी अवमानना याचिकाओं को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए दिनांक 07/12/2021 को दिए गए महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन में टीजीटी तथा पीजीटी विज्ञापन 2021 की भर्ती परीक्षा में सफल न होने वाले सभी अवैधानिक तदर्थ /अल्पकालिक शिक्षकों का वेतन भुगतान तत्काल रोकने का आदेश देने की कृपा करें।

(3)- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में तदर्थवाद समाप्त करने हेतु उ0 प्र0 मा0 शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, प्रयागराज द्वारा जारी ऑनलाइन अधियाचन पोर्टल पर जनपद प्रतापगढ़, सुल्तानपुर सहित सभी जनपदों के 07अगस्त 1993 से लेकर 26/08/2020 तक अवैधानिक रूप से नियुक्त तथा टीजीटी/पीजीटी विज्ञापन 2021की भर्ती परीक्षा में सफल न होने वाले तदर्थ शिक्षकों के रिक्त पदों का आनलाइन अधियाचन तत्काल भेजने का आदेश देने की कृपा करें।
इससे हम सभी चयन बोर्ड प्रतियोगियों का हित संरक्षित हो सकेगा।
सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित-

1-अध्यक्ष/सचिव, उ०प्र०मा०शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, प्रयागराज।
2- डॉ० महेन्द्र देव (अपर शिक्षा निदेशक, मा०शिक्षा ) उ०?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *