Thursday, February 22, 2024
Secondary Education

ऑनलाइन शिक्षण की ओर बढ़ते कदम – अशोक कुमार

जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महkव है। शिक्षा जीवन में बहुत से उद्देश्यों को प्रदान करती है जैसे व्यक्तिगत उन्नति को बढ़ावा‚ सामाजिक स्तर में बढ़ावा‚ सामाजिक स्वास्थ्य में सुधार‚ आÌथक प्रगति‚ राष्ट्र की सफलता‚ जीवन लIयों का निर्धारण‚ सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता और पर्यावरण समस्याओं के लिए हल प्रदान करना और अन्य! शिक्षा और ज्ञान न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है‚ बल्कि अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी आवश्यक है। ॥ किसी देश को नष्ट करने के लिए परमाणु बम की आवश्यकता नहीं होती। किसी देश की शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दें तब वह देश अपने आप ही नष्ट हो जाता है। इसीलिए आवश्यक है कि हम देश की शिक्षा व्यवस्था को सुंदर बनाएं। भारत में शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में चर्चा २०१७ से गति पकड़ रही है‚ जिस वर्ष हमने कौशल विकास‚ रोजगार योग्यता और शिक्षा प्रक्रिया के डिजिटलीकरण पर जोर दिया था। इसके अलावा‚ २१वीं सदी की एक ‘ब्लैक स्वान’ घटना कोविड–१९ ने ऑनलाइन शिक्षा सीखने को बहुत प्रेरित किया। कोविड–१९ एक वर्ष से अधिक समय से कहर बरपा रही है‚ जीवन और आजीविका को बाधित कर रही है। २०२० में कोविड–१९ के प्रसार के डर से प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की शैक्षिक संस्थाओं को अचानक बंद कर देना पड़ा। पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया‚वाÌषक परीक्षाएं पूर्ण नहीं हो सकीं। ॥ भारत सीखने की प्रक्रिया को डिजिटलाइज करने में आगे बढ़ रहा है‚ दुनिया भर में विश्वविद्यालय शिक्षण और सीखने में नवाचार कर रहे हैं। वर्तमान में शिक्षकों ने मिश्रित शिक्षा को अनूठे रूप में अपनाया है‚ एक उम्मीद है कि एक दशक के समय में‚ मिश्रित शिक्षा उपलब्ध तकनीक के कारण अपवाद के बजाय आदर्श बन जाएगी। आज इंटरनेट एवं डिजिटल आधारित शिक्षा और कक्षा में पढ़ाई के मिश्रित शिक्षा कार्यक्रम को ब्लेंडेड कक्षा या ‘मिश्रित शिक्षा’ कहा जाता है। सरल शब्दों में‚ यह शिक्षण का एक संकर रूप है जिसमें कक्षा और ऑनलाइन शिक्षा‚ दोनों शामिल हैं। ब्लेंडेड शिक्षा का विचार बहुत सालों से है लेकिन इसका संकल्प इक्कीसवीं सदी की शुरुûआत में ज्यादा प्रचलित हुआ है। ब्लेंडेड शिक्षा की सही परिभाषा २००६ में लिखी एक पुस्तिका में पहली बार प्रकाशित हुई। दूरस्थ शिक्षा के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के आज के उभार को पारंपरिक शिक्षा प्रणाली की कमजोरियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। नियमित शिक्षण की सीमाओं के कारण ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को लोकप्रिय बनाने का एकमात्र उद्देश्य आमने–सामने सीखने की प्रक्रिया को पूरक बनाना था॥। छात्रों को ऑनलाइन–डिजिटल माध्यमों के साथ पारंपरिक कक्षा विधियों को संयोजित करने की अनुमति देता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि ऑनलाइन सामग्री की उपलब्धता काफी समय से है और छात्र आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग कर रहे हैं। देश में आमने–सामने‚ शिक्षक और विद्यार्थी‚ सीखने की लंबी परंपरा है; शिक्षक या गुरु को एक अनदेखी‚ तकनीकी इकाई के साथ रातोंरात नहीं बदला जा सकता। शिक्षक वातावरण का निर्माण करते हैं‚ शिक्षण की गुणवत्ता अच्छी करने के लिए कक्षाओं में सीखने के लिए कारकों को बढ़ावा देते हैं। कक्षा शिक्षण की तुलना ऑनलाइन सामग्री के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा से नहीं की जा सकती। पिछले दशक में मिश्रित टीचिंग–लनिÈग की अवधारणा को विश्व के अधिकांश विश्वविद्यालयों ने अपनाया है। इस तकनीक में प्रत्यक्ष शिक्षण के साथ ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी चलाए जाते हैं। मिश्रित व्यवस्था के अनेक फायदे हैं‚ तो कुछ नुकसान भी हैं। वास्तव में कोई भी तकनीक सौ प्रतिशत सही नहीं हो सकती। लेकिन सबसे अच्छी बात है कि इससे फीस पर होने वाला व्यय कम किया जा सकता है और विद्याÌथयों का एनरोलमेंट बढ़ाया जा सकता है। मिश्रित शिक्षा छात्रों को वैश्विक दुनिया के लिए एक खिड़की प्रदान करती है जिसके कारण छात्र पारंपरिक व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रमों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर सकते हैं‚ और विश्वविद्यालयों और शिक्षण प्रदाताओं के व्यापक कार्य को पूरक बना सकते हैं। ॥ संक्षेप में‚ मिश्रित शिक्षा का उद्देश्य उन समस्याओं को हल करना है‚ जो नीति निर्माताओं‚ प्रशासकों और छात्रों को परेशान करती हैं‚ जबकि कई शिक्षकों ने सीखने के इस अनूठे रूप को अपनाया है। ऑनलाइन सामग्री का वर्तमान उपयोग केवल कक्षा में आमने–सामने शिक्षण की कमियों को पूरा करने के लिए किया गया है। स्नातक स्तर पर कुछ विषयों के ऑनलाइन सीखने पर निर्भरता नियामक निकायों द्वारा रखी गई है‚ लेकिन शिक्षाविद् की उनके सीखने के परिणामों के बारे में मिश्रित राय है। शिक्षाविद् के एक वर्ग ने स्नातक स्तर पर कुछ विषयों को विशेष रूप से ऑनलाइन मोड के माध्यम से कवर करने के उद्दे्य की सराहना नहीं की। विशेष रूप से जब प्रयोगशाला विषयों की बात आती है‚ तो उन्हें आभासी प्रयोगशाला कक्षाओं के रूप में पढ़ाना समझ से बाहर है। प्रयोगशाला विषय मुख्य रूप से सीखने के लिए होते हैं‚ जो ऑनलाइन प्रयोगशाला कक्षाओं के माध्यम से संभव नहीं। यहां समझना महkवपूर्ण है कि स्नातकोत्तर स्तर और स्नातक स्तर के बीच उनकी उम्र‚ परिपक्वता‚ जोखिम‚ जिम्मेदारी की भावना‚ समझ के स्तर आदि के संबंध में अंतर है। स्नातकोत्तर छात्रों की उम्र उन्हें कार्य करने के लिए पर्याप्त परिपक्व बनाती है। उपलब्ध डिजिटल सामग्री से स्व–उन्मुख शिक्षा जबकि स्नातक छात्र तृतीयक शिक्षा प्रणाली में नये प्रवेशक होने के कारण स्व–उन्मुख शिक्षा के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं है। ॥ प्रेरणा की अनुपस्थिति और अपने दम पर पढ़ने के लिए जोर देने से स्नातक छात्रों को नुकसान होता है। स्नातक छात्रों द्वारा शिक्षकों के साथ आमने–सामने सीखने के दौरान समान डिजिटल सामग्री का उपयोग उनके सीखने में उल्लेखनीय सुधार लाता है। इसलिए डिजिटल सामग्री के साथ नियमित कक्षा शिक्षण को पूरक करने के प्रयास गुणवत्ता लाभ में मदद करते हैं‚ लेकिन ऑनलाइन मोड द्वारा स्व–शिक्षण पर पूर्ण निर्भरता चुनौतियों से भरी है। विशाल आबादी और बदलती सामाजिक–आÌथक परिस्थितियों वाले देश में ऑनलाइन शिक्षा पर अधिक निर्भरता को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए। ऑनलाइन शिक्षण को व्यावहारिकता के धरातल पर देखें तो जो तस्वीर उभर कर आई है‚ वह यह है कि हमारे देश में ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के रास्ते में अनेक व्यावहारिक बाधाएं आई हैं जैसे सभी शिक्षकों और विद्याÌथयों के पास स्मार्ट फोन/कंप्यूटर/लैपटॉप की सुविधा न होना‚ इंटरनेट‚ ब्रॉडबैंड़ का सुचारू रूप से उपलब्ध ना होना‚ ऑनलाइन शैक्षिक टूल्स की जानकारी न होना‚ पुस्तकालयों का डिजिटल न होना‚ ई–कंटेंट उपलब्ध न होना। बिजली आपूÌत की उपलब्धता और तकनीकी व्यवधानों से निपटना‚ छात्रों की भागीदारी‚ रु चि‚ प्रेरणा की कमी और नि्क्रिरय रवैया। छात्रों में कंप्यूटर साक्षरता और संचार कौशल की कमी‚ शिक्षक और छात्रों के बीच कोई आमने–सामने संपर्क नहीं होना जिससे मार्गदर्शन का अभाव हो‚ छात्रों के लिए सीखने के माहौल पर घरेलू कारकों का प्रभाव‚ परीक्षा प्रणाली में नवाचार और मूल्यांकन प्रणाली में अनुचित प्रथाओं का उपयोग आदि॥। ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों में रहने वाले विद्याÌथयों से संपर्क स्थापित करना और ऑनलाइन शिक्षण से उनका पाठ्यक्रम पूरा करना भी बड़ी समस्या है। इस प्रकार‚ उच्च शिक्षा का वर्चुअलाइजेशन शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। उपलब्ध जनसांख्यिकीय लाभांश को देखते हुए देश के लिए युवा आबादी को सर्वोत्तम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लैस करने का उपयुक्त समय है ताकि वैश्विक नेता बनने के लिए शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की जा सके। मिश्रित शिक्षा भारतीय शिक्षा का भविष्य है। लेकिन शासन में अकादमिक समुदाय को पारंपरिक तरीके से शिक्षित होने की अपनी यात्रा को नहीं भूलना चाहिए और उच्च शिक्षा के वर्चुअलाइजेशन को सावधानी से संभालना चाहिए। प्रौद्योगिकी का उपयोग केवल सीखने की गुणवत्ता और ज्ञान साझा करने के पूरक के लिए किया जाना चाहिए। आइए‚ हम शिक्षा के वर्चुअलाइजेशन को सावधानी से संभालें ताकि इसमें पहुंच‚ समानता और गुणवत्ता में कमी न हो और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने की यात्रा बाधित न हो। ॥ नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन शिक्षण के लिए विश्वविद्यालयों को आवश्यक संसाधन मुहैया करने की बात भी कही गई है‚ जिसमें डिजिटल इं£ास्ट्रक्चर से लेकर फैकल्टी के लिए कैपेसिटी डवलपमेंट प्रोग्राम विकसित करना भी शामिल है। इसके अनुसार विषय विशेषज्ञों को डिजिटल कंटेंट तैयार करने और उसको उचित प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए प्रशिक्षण दिए जाएंगे। लेकिन आने वाले समय में पाठ्यक्रम का स्वरूप क्या हो‚ उसका कितना भाग प्रत्यक्ष हो‚ कितना ऑनलाइन हो‚ ऑनलाइन परीक्षाएं किस प्रकार आयोजित हों इत्यादि मुद्दों पर भी शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्पष्ट दिशा–निर्देश अति शीघ्र लागू किए जाने की आवश्यकता है॥। (लेखक जयपुर स्थित निर्वाण विश्वविद्यालय के कुलपति हैं)॥ द॥

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