अन्य स्रोतों से आय

च—अन्य स्रोतों से आय

अन्य स्रोतों से आय

56. (1) हर प्रकार की ऐसी आय जिसे इस अधिनियम के अधीन कुल आय में से अपवर्जित नहीं किया जाना है, यदि वह धारा 14 के मद क से लेकर मदड़ तक में निर्दिष्ट शीर्षों में से किसी के अधीन आय-कर से प्रभार्य नहीं है, तो “अन्य स्रोतों से आय” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य होगी।

(2) विशिष्टत: और उपधारा (1) के उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित आय “अन्य स्रोतों से आय” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य होगी, अर्थात्:—

(i)लाभांश;

(iकधारा 2 के खंड (24) के उपखंड (viii) में दी गई आय;

(iखधारा 2 के खंड (24) के उपखंड (ix) में दी गई आय;

(iगधारा 2 के खंड (24) के उपखंड (x) में निर्दिष्ट आय, यदि ऐसी आय “कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य नहीं है;

(iघ) प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में आय, यदि ऐसी आय “कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य नहीं है;

(ii) निर्धारिती की मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर को किराए पर दिए जाने से होने वाली आय यदि वह आय “कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य नहीं है;

(iii)जहां निर्धारिती अपनी मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर को और भवनों को भी किराए पर देता है और ऐसे भवनों का किराये पर दिया जाना उक्त मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के किराये पर दिए जाने से अपृथक्करणीय है, वहां ऐसे किराए से होने वाली आय, यदि वह आय “कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य नहीं है;

(ivधारा 2 के खंड (24) के उपखंड (xi)में निर्दिष्ट आय, यदि ऐसी आय “कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ” या “वेतन” शीर्ष के अधीन आय-कर से प्रभार्य है।

(v) जहां किसी व्यष्टि या किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब द्वारा 1 सितम्बर, 2004 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 अप्रैल, 2006 से पूर्व किसी व्यक्ति से पच्चीस हजार रुपए से अधिक की धनराशि बिना प्रतिफल के प्राप्त की जाती है, वहां ऐसी समस्त राशि :

परन्तु यह कि यह खंड किसी ऐसी राशि के संबंध में लागू नहीं होगा जो—

() किसी नातेदार से; या

() व्यष्टि के विवाह के अवसर पर; या

() किसी वसीयत के अधीन या विरासत के रूप में; या

() दाता की मृत्यु को आसन्न मानकर;

(ड़धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित किसी स्थानीय प्राधिकारी से; या

(धारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट किसी निधि या प्रतिष्ठान या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था या किसी न्यास अथवा संस्था से; या

(73कक[धारा 12कक और धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था से,

प्राप्त की जाती है।

स्पष्टीकरण.—इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए “नातेदार” से अभिप्रेत है,—

(i) व्यष्टि का पति/की पत्नी;

(ii) व्यष्टि का भाई या बहन;

(iii) व्यष्टि के पति/की पत्नी का भाई या बहन;

(iv) व्यष्टि के माता-पिता में से किसी का भाई या बहन;

(v) व्यष्टि का कोई पारंपरिक पूर्वपुरुष या वंशज;

(vi) व्यष्टि के पति/की पत्नी का कोई पारंपरिक पूर्वपुरुष या वंशज;

(vii) खंड (ii) से खंड (vi) में निर्दिष्ट व्यक्ति का पति/की पत्नी।

(vi) जहां कोई धनराशि जिसका सकल मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, बिना प्रतिफल के किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब को किसी पूर्ववर्ष में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों से 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 अक्तूबर, 2009 से पूर्व प्राप्त होती है वहां ऐसी राशि का सकल मूल्य :

परन्तु यह खंड किसी धनराशि को लागू नहीं होगा जो—

() किसी नातेदार से; या

() किसी व्यष्टि के विवाह के अवसर पर; या

() किसी विल के अधीन या विरासत के रूप में; या

() किसी दाता के मृत्यु को आसन्न मानकर; या

(ड़धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित किसी स्थानीय प्राधिकारी से; या

() किसी निधि या स्थापन या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था या किसी न्यास या धारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट संस्था से; या

(73कख[धारा 12कक और धारा 12कखके अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था से, प्राप्त होती हैं।

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए “नातेदार” से निम्नलिखित अभिप्रेत है,—

(i) व्यष्टि का पति/पत्नी;

(ii) व्यष्टि का भाई या बहन;

(iii) व्यष्टि की पत्नी/पति का भाई या बहन;

(iv) व्यष्टि के माता-पिता में से किसी का भाई या बहन;

(v) व्यष्टि का कोई पारंपरिक पूर्वपुरुष या वंशज;

(vi) व्यष्टि के पति या पत्नी का कोई पारंपरिक पूर्वपुरुष या वंशज;

(vii) खंड (ii) से खंड (vi) में निर्दिष्ट व्यक्ति का पति/पत्नी।

(vii) जहां किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब को किसी पूर्ववर्ष में किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों से 1 अक्तूबर, 2009 को या उसके पश्चात् 74[किंतु 1 अप्रैल, 2017 से पूर्व]—

() कोई धनराशि, जिसका कुल मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, बिना प्रतिफल के प्राप्त होती है, वहां ऐसी राशि का कुल मूल्य;

() कोई स्थावर संपत्ति,—

(i) प्रतिफल के बिना, जिसका स्टांप शुल्क मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, ऐसी संपत्ति का स्टांप शुल्क मूल्य;

(ii) उस प्रतिफल के लिए, जो संपत्ति के स्टांप शुल्क मूल्य से पचास हजार रुपए से अधिक रकम तक कम है, ऐसी संपत्ति का स्टांप शुल्क मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है :

परंतु जहां स्थावर संपत्ति के अंतरण के लिए प्रतिफल की रकम नियत करने के करार की तारीख और रजिस्ट्रीकरण की तारीख एक नहीं है, वहां इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए करार की तारीख को स्टांप शुल्क मूल्य लिया जा सकेगा:

परंतु यह और कि उक्त परंतुक केवल ऐसे किसी मामले में लागू होगा जहां उसमें निर्दिष्ट प्रतिफल की रकम या उसके किसी भाग का, ऐसी स्थावर संपत्ति के अंतरण के लिए करार की तारीख को या उसके पूर्व नकद से भिन्न किसी ढंग द्वारा संदाय किया गया है;

परंतु जहां उपखंड () में निर्दिष्ट स्थावर संपत्ति के स्टांप शुल्क मूल्य पर निर्धारिती द्वारा धारा 50ग की उपधारा (2) में वर्णित आधारों पर विवाद किया जाता है वहां निर्धारण अधिकारी ऐसी संपत्ति के मूल्यांकन को मूल्यांकन अधिकारी को निर्दिष्ट कर सकेगा और धारा 50ग और धारा 155 की उपधारा (15) के उपबंध, जहां तक हो सके, उपखंड () के प्रयोजनों के लिए ऐसी संपत्ति के स्टांप शुल्क मूल्य के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उन धाराओं के अधीन पूंजी आस्ति के मूल्यांकन के संबंध में लागू होते हैं:

() स्थावर संपत्ति से भिन्न कोई संपत्ति,—

(i) जिसका कुल उचित बाजार मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, बिना प्रतिफल के प्राप्त होती है, वहां ऐसी संपत्ति का संपूर्ण कुल उचित बाजार मूल्य;

(ii) ऐसे प्रतिफल के लिए प्राप्त होती है, जो उस संपत्ति के कुल उचित बाजार मूल्य से उतना कम है, जो पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां ऐसी संपत्ति का कुल उचित बाजार मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है:

परंतु यह और कि यह खंड किसी ऐसी धनराशि या संपत्ति को लागू नहीं होगा, जो,—

() किसी नातेदार से; या

() किसी व्यष्टि के विवाह के अवसर पर; या

() किसी विल के अधीन या विरासत के रूप में; या

() यथास्थिति, संदाता या दाता की मृत्यु को आसन्न मानकर; या

(ड़धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित किसी स्थानीय प्राधिकारी से; या

(धारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट किसी निधि या स्थापन या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था या किसी न्यास अथवा किसी संस्था से; या

(74क[धारा 12कक और धारा 12कख ] के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था से; या

(धारा 47 के खंड (viगख) या खंड (viघ) या खंड (vii) के अधीन अंतरण न माने गए संव्यवहार द्वारा,

प्राप्त होती है।

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() “निर्धारणीय” का वही अर्थ है जो धारा 50ग की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 2 में उसका है;

() किसी स्थावर संपत्ति से भिन्न किसी संपत्ति के “उचित बाजार मूल्य” से वह मूल्य अभिप्रेत है जो उस पद्धति के अनुसार, जो विहित की जाए, अवधारित किया जाए;

() “आभूषण” का वही अर्थ है जो धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (ii) के स्पष्टीकरण में उसका है;

() “संपत्ति” से निर्धारिती की निम्नलिखित पूंजी आस्ति अभिप्रेत है, अर्थात् :-

(i) स्थावर संपत्ति, जो भूमि या भवन या दोनों ही हों;

(ii) शेयर और प्रतिभूतियां;

(iii) आभूषण;

(iv) पुरातत्वीय संग्रहण;

(v) ड्रार्इंग;

(vi) पेंटिंग;

(vii) मूर्तियां;

(viii) कोई कलाकृति; या

(ix) बुलियन;

(ड़) “नातेदार” से,—

(i) किसी व्यष्टि की दशा में—

() व्यष्टि की पत्नी या पति;

() व्यष्टि का भाई या बहन;

() व्यष्टि की पत्नी या पति का भाई या बहन;

() व्यष्टि के माता-पिता में से किसी का भाई या बहन;

() व्यष्टि का कोई पारंपरिक पूर्व पुरुष या वंशज;

() व्यष्टि की पत्नी या पति का कोई पारंपरिक पूर्व पुरुष या वंशज;

() मद () से () में निर्दिष्ट व्यक्ति की पत्नी या पति; और

(ii) हिन्दू अविभक्त कुटुंब की दशा में, उसका कोई सदस्य, अभिप्रेत है;

() “स्टांप शुल्क मूल्य” से किसी स्थावर संपत्ति की बाबत स्टांप-शुल्क के संदाय के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा अंगीकृत या निर्धारित या निर्धारणीय मूल्य अभिप्रेत है;

(viiक) जहां कोई फर्म या कंपनी, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, 1 जून, 2010 को या उसके पश्चात् 75[किंतु 1 अप्रैल, 2017 से पूर्व] किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों से किसी पूर्ववर्ती वर्ष में कोई संपत्ति, जो ऐसी किसी कंपनी के, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, शेयर हैं,

(i) बिना प्रतिफल के, प्राप्त करती है, जिसका सकल उचित बाजार मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, ऐसी संपत्ति का संपूर्ण सकल उचित बाजार मूल्य ;

(ii) ऐसे प्रतिफल के लिए, प्राप्त करती है, जो पचास हजार रुपए से अधिक राशि की संपत्ति के सकल उचित बाजार मूल्य से कम है, ऐसी संपत्ति का वह सकल उचित बाजार मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है :

परंतु यह खंड धारा 47 के खंड (viक) या खंड (viग) या खंड (viगख) या खंड (viघ) या खंड (vii) के अधीन अंतरण न समझे जाने वाले किसी संव्यवहार के रूप में प्राप्त किसी ऐसी संपत्ति को लागू नहीं होगा।

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, किसी संपत्ति के, जो ऐसी किसी कंपनी के, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, शेयर हैं, “उचित बाजार मूल्य” का वही अर्थ है, जो उसका खंड (vii) के स्पष्टीकरण में है;

(viiख) जहां कोई कंपनी, जो ऐसी कंपनी नहीं है जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, किसी पूर्ववर्ष में, ऐसे किसी व्यक्ति से, जो निवासी है, शेयरों के निर्गमन के लिए कोई प्रतिफल प्राप्त करती है, जो ऐसे शेयरों के अंकित मूल्य से अधिक है, वहां ऐसे शेयरों के लिए प्राप्त कुल प्रतिफल, जो शेयरों के उचित बाजार मूल्य से अधिक है :

परंतु यह खंड उस दशा में लागू नहीं होगा, जहां शेयरों के निर्गमन के लिए प्राप्त प्रतिफल,—

(i) किसी जोखिम पूंजी कंपनी या किसी जोखिम पूंजी निधि 75क[या कोई विनिर्दिष्ट निधि] से किसी जोखिम पूंजी उपक्रम द्वारा; या

(ii) व्यक्तियों के ऐसे किसी वर्ग या वर्गों से, जो केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किए जाएं, किसी कंपनी द्वारा, प्राप्त किया जाता है।

75कक[परंतु यह और कि जहां इस खंड के उपबंधों को, पहले परंतुक के खंड (ii) के अधीन जारी की गई अधिसूचना में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने मद्दे लागू नहीं किया गया है और कंपनी ऐसी शर्तों में से किसी शर्त का अनुपालन करने में असफल रहती है, वहां शेयर के पुरोधरण के लिए प्राप्त किया गया कोई प्रतिफल, जो ऐसे शेयर के उचित बाजार मूल्य से अधिक है, उस वित्तीय वर्ष के लिए, जिसमें उक्त शर्तों में से किसी शर्त का पालन करने की असफलता हुई है, उस कंपनी की आय-कर से प्रभार्य आय समझा जाएगा और यह भी समझा जाएगा कि कंपनी ने उक्त पूर्ववर्ष के लिए धारा 270क की उपधारा (8) और उपधारा (9) में निर्दिष्ट गलत रिपोर्ट दिए जाने के परिणामस्वरूप उक्त आय को कम रिपोर्ट किया है;]

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() शेयरों का उचित बाजार मूल्य, वह मूल्य होगा—

(i) जैसा उस पद्धति के अनुसार, जो विहित की जाए, अवधारित किया जाए; या

(ii) जैसा कंपनी द्वारा शेयरों के निर्गमन की तारीख को अपनी आस्तियों के, जिनके अंतर्गत अमूर्त आस्तियां भी हैं, जो गुडविल, व्यवहार्य ज्ञान, पेटेंट, प्रतिलिप्याधिकार, व्यापार चिद्द, अनुज्ञप्तियां, फ्रेंचाइज या समान प्रकृति के कोई अन्य कारबार संबंधी या वाणिज्यिक अधिकार हैं, मूल्य के आधार पर, निर्धारण अधिकारी के समाधानप्रद रूप में सिद्ध किया जाए,

इनमें से जो भी उच्चतर हो;

75कक[(कक) “विनिर्दिष्ट निधि” से ऐसी निधि अभिप्रेत है, जिसे किसी न्यास या कंपनी या सीमित दायित्व भागीदारी या निगमित निकाय के रूप मे भारत में स्थापित किया गया है या निगमित किया गया है और जिसे प्रवर्ग 1 या प्रवर्ग 2 की वैकल्पिक विनिधान निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र दिया गया है और जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (वैकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 द्वारा विनियमित है;

(कख) “न्यास” से भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन स्थापित कोई न्यास अभिप्रेत है;]

() “जोखिम पूंजी कंपनी”, “जोखिम पूंजी निधि” और “जोखिम पूंजी उपक्रम” के वही अर्थ हैं जो धारा 10 के खंड (23चख) के स्पष्टीकरण के खंड (), खंड () और खंड () में क्रमश: उनके हैं;

(viii75ख[धारा 145ख की उपधारा (1) में] निर्दिष्ट प्रतिकर या वर्धित प्रतिकर पर प्राप्त ब्याज के रूप में आय।

(ix) किसी पूंजी आस्ति के अंतरण के लिए बातचीत के अनुक्रम में किसी अग्रिम के रूप में या अन्यथा प्राप्त कोई धनराशि, यदि,—

() ऐसी रकम समपहृत हो जाती है; और

() ऐसी बातचीत के परिणामस्वरूप ऐसी पूंजी आस्ति का अंतरण नहीं होता है।

76[(x) जहां कोई व्यक्ति पूर्ववर्ष में 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात्,—

() किसी व्यक्ति या व्यक्तियों से, बिना प्रतिफल के ऐसी धनराशि प्राप्त करता है, जिसका कुल मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां ऐसी राशि का समग्र कुल मूल्य;

() किसी व्यक्ति या व्यक्तियों से,—

() बिना प्रतिफल के ऐसी स्थावर संपत्ति प्राप्त करता है, जिसके स्टांप शुल्क का मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां ऐसी संपत्ति का स्टांप शुल्क मूल्य;

76क[() किसी प्रतिफल के लिए, यदि संपत्ति का स्टाम्प शुल्क मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है, यदि ऐसे आधिक्य की रकम निम्नलिखित में से उच्चतर रकमों से अधिक है, अर्थात्:—

(i) पचास हजार रुपए की रकम; और

(ii) प्रतिफल के 76कक[दस प्रतिशत] के बराबर रकम:]

परंतु जहां स्थावर संपत्ति के अंतरण के लिए प्रतिफल की रकम को नियत करने वाले करार की तारीख और उसके रजिस्ट्रीकरण की तारीख एक समान नहीं है, वहां करार की तारीख को स्टांप शुल्क मूल्य इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए विचार में लिया जा सकेगा:

परंतु यह और कि पहले परंतुक का उपबंध केवल उस दशा में लागू होगा, जहां ऐसी स्थावर संपत्ति का अंतरण के लिए करार की तारीख को या उससे पूर्व उसमें निर्दिष्ट प्रतिफल की रकम या उसके किसी भाग को पाने वाले के खाते में संदेय चेक या किसी बैंक ड्राफ्ट द्वारा या किसी बैंक खाते 76ख[या किसी ऐसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति से, जो विहित की जाए] के माध्यम से इलैक्ट्रानिक निकासी प्रणाली का उपयोग करते हुए संदत्त किया गया है:

परंतु यह भी कि जहां स्थावर संपत्ति का स्टांप शुल्क मूल्य धारा 50ग की उपधारा (2) में उल्लिखित आधारों पर निर्धारिती द्वारा विवादित है, वहां निर्धारण अधिकारी ऐसी संपत्ति के मूल्यांकन को मूल्यांकन अधिकारी को निर्दिष्ट कर सकेगा और धारा 50ग तथा धारा 155 की उपधारा (15) के उपबंध, यथाशक्य इस उपखंड के प्रयोजन के लिए ऐसी संपत्ति के स्टांप शुल्क मूल्य के संबंध में वैसे ही लागू होंगे, जैसे कि वे उन धाराओं के अधीन पूंजी आस्ति के मूल्यांकन के लिए लागू होते हैं;

76खख[परन्तु यह भी कि धारा 43गक की उपधारा (1) के दूसरे परन्तुक में निर्दिष्ट की गई संपत्ति की दशा में, मद (आ) की उपमद (ii) के उपबंध उसी प्रकार प्रभावी होंगे मानो “दस प्रतिशत” शब्दों के स्थान पर, “बीस प्रतिशत” शब्द रखे गए हों;]

() स्थावर संपत्ति से भिन्न कोई संपत्ति—

() बिना प्रतिफल के, जिसका कुल उचित बाजार मूल्य पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां ऐसी संपत्ति के कुल उचित बाजार मूल्य का समग्र मूल्य;

() प्रतिफल के लिए, जो संपत्ति के समग्र कुल उचित बाजार मूल्य से पचास हजार रुपए से अधिक की रकम से कम है, वहां ऐसी संपत्ति का वह समग्र उचित बाजार मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है:

परंतु यह खंड,—

(I) किसी नातेदार से; या

(II) व्यष्टि के विवाह के अवसर पर; या

(III) वसीयत के अधीन या उत्तराधिकार के माध्यम से; या

(IV) यथास्थिति, संदायकर्ता या दानकर्ता की मृत्यु को आसन्न मान कर; या

(Vधारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित किसी स्थानीय प्राधिकारी से; या

(VIधारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट किसी निधि या प्रतिष्ठान या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था या किसी न्यास या संस्था से; या

(VII76ग[धारा 12क या धारा 12ककके अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था से या उसके द्वारा; या

(VIIIधारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा; या

(IX) ऐसे संव्यवहार के माध्यम से, जो धारा 47 के खंड (i) या 77[खंड (iv) या खंड (v) या] खंड (vi) या खंड (viक) या खंड (viकक) या खंड (viख) या खंड (viग) या खंड (viगक) या खंड (viगख) या खंड (viघ) या खंड (vii) या 76गग [ खंड (viiकघ) या खंड (viiकङ) या खंड (viiकच) या] के अधीन अंतरण नहीं माना जाता है,

(X) केवल व्यष्टि के नातेदार के फायदे के लिए ही सृजित या स्थापित किसी न्यास द्वारा किसी व्यष्टि से,—

प्राप्त किसी धनराशि या किसी संपत्ति को लागू नहीं होगा।

77कक[(XI) व्यक्तियों के ऐसे वर्ग से और ऐसी शर्तों, जो विहित की जाएं, के अधीन रहते हुए]

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, “निर्धारणीय”, “उचित बाजार मूल्य”, “आभूषण”, “संपत्ति”, “नातेदार” और “स्टांप शुल्क मूल्य” के वही अर्थ होंगे, जो खंड (vii) के स्पष्टीकरण में क्रमश: उनके हैं।]

77क[(xi) किसी व्यक्ति को, उसके नियोजन की समाप्ति या उसके नियोजन के निबंधनों और शर्तों के उपांतरण से संबंधित उसे शोध्य या उसके द्वारा प्राप्त कोई प्रतिकर या अन्य संदाय चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हो।]

76खख. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित।

1a. इटैलिक में दिए गए शब्द वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2022 से अंत:स्थापित किए जाएंगे।

73कक. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से “धारा 12कक” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 “धारा 12कक और धारा 12कख” शब्दों के स्थान पर तथा वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से प्रतिस्थापित।

73कख. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से “धारा 12कक” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 “धारा 12कक और धारा 12कख” शब्दों के स्थान पर तथा वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से प्रतिस्थापित।

74. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

74क. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से “धारा 12कक” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 से “धारा 12कक और धारा 12कख” शब्दों के स्थान तथा वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से प्रतिस्थापित।

75. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

75क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

75कक. वित्त (सं 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

75ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा भूतलक्षी प्रभावसे 1.4.2017 से “धारा 145क के खंड () में” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

76. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

76क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व मद (आ) इस प्रकार थी।

“() प्रतिफल के लिए ऐसी स्थावर संपत्ति प्राप्त करता है, जो संपत्ति के स्टांप शुल्क मूल्य से उतनी रकम से कम है, जो पचास हजार रुपए से अधिक है, वहां ऐसी संपत्ति का उतना स्टांप शुल्क मूल्य, जो ऐसे प्रतिफल से अधिक है:”

76कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से “पांच प्रतिशत”  शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

76ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

76ग. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से “धारा 12क और धारा 12कक” शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2020 से “धारा 12क या धारा 12कक या धारा 12कख” शब्दों के स्थान पर तथा  अधिनियम, 2020 द्वारा 1.6.2020 से प्रतिस्थापित।

76गग. इटैलिक में दिए गए शब्द वित्त अधिनियम, 2021 दवारा 1.4.2022 से अंतस्थापित किए जाएंगे।

77. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

77क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से अंत:स्थापित।

77कक. वित्त (सं 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित

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