उत्तर प्रदेश सरकार माध्यमिक शिक्षा की उन्नति के लिए समय-समय पर अनेक कानूनों का निर्माण करती है लेकिन सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों के द्वारा इन कानूनों की धज्जियां उड़ाई जाती रही प्रकरण राजधानी की सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत 89 शिक्षकों की भर्ती का है इन शिक्षकों की भर्ती विभागीय नियमों की अनदेखी करके की गई थी अनेक प्रकार की अनियमितता नियुक्तियों में पाई गई जिसकी पुष्टि अपर शिक्षा निदेशक स्तर पर की गई जांच से हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षक प्रथम डॉ मुकेश कुमार सिंह को इन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन के रूप में किए गए भुगतान पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने निदेशालय की ओर से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16 ई(10) के तहत नियुक्तियों को निरस्त करने का आदेश दिया है। इसी के आधार पर डीआईओएस प्रथम और द्वितीय से प्रस्ताव मांगा गया है। भर्तियों के द्वारा राजकोष के ₹13 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। जिसकी वसूली इन शिक्षकों से की जायेगी। विभाग ने इन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है।
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